बो बचपन के दिन

वह बचपन के दिन मुझे भी जीने लेने दो बारिश में आज मुझे भी भीग लेने दो सोंधी सोंधी मिट्टी की सुगंध मुझे भी सूंघ लेने दो वह कागज की नाव मुझे भी बहा लेने दो यह वक्त फिर ना आएगा कल तक तो यह हाथों से निकल जाएगा तो क्यों ना जीयु में आजContinue reading “बो बचपन के दिन”

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